ऐसा दीप जलाओ साथी
नफ़रत की दीवार गिराकर,
सबको गले लगाओ साथी
ऐसा दीप जलाओ साथी
हर  कोने में नहीं उजाला,
कितने दीप जलाये तुमने ?
घोर अमावास के घेरे में
कितने सत्य छुपाये तुमने ?
बागी यौवन को जीवन से ,
कुछ तो ज़रा मिलाओ साथी
ऐसा दीप जलाओ साथी !!
निर्दोषों का रक्त बहाकर,
जाने उनको क्या मिलाता है ?
हिंसा के तपते उपवन में
कोई बीज कहाँ फलता है ?
दिव्य-प्रेम की मर्यादा का ,
उनको पाठ पढाओ साथी !!
ऐसा दीप जलाओ साथी
धरती से अम्बर तक जगमग
समता का दीपक मुस्कुराये |
सतरंगी परिधान पहन कर
नवदीपो का मौसम आये |
सबको साया मिले प्यार का ,
ऐसा वृक्ष  लगाओ    साथी
ऐसा दीप जलाओ साथी
शिव नारायण भटनागर ‘साकी ’ 
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Abhishek bhatnagar

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